“Teacher’s Negligence Sparks Debate on Misuse of SC/ST Act in Bhadohi School”

“Teacher’s Negligence Sparks Debate on Misuse of SC/ST Act in Bhadohi School”

भदोही स्कूल में टीचर की लापरवाही से भड़की बहस: SC/ST एक्ट के दुरुपयोग पर सवाल

भदोही, उत्तर प्रदेश, 21 सितंबर 2025: एक छोटे से स्कूल की घटना ने पूरे देश में जातिवाद और कानून के दुरुपयोग पर बहस छेड़ दी है। भदोही के एक सरकारी स्कूल में एक टीचर की लापरवाही से कुछ बच्चों को चोट लगी, और इसके बाद SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज हो गया। लेकिन अब लग रहा है कि ये केस बदले की भावना से फाइल किया गया। लोकल लोग और सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि अच्छे कानून का बुरा इस्तेमाल हो रहा है। क्या ये न्याय है या सिर्फ बदला? आइए, इसकी पूरी कहानी समझें।

ये सब 15 सितंबर को शुरू हुआ। भदोही के एक प्राइमरी स्कूल में टीचर रमेश सिंह क्लास के दौरान बच्चों को होमवर्क चेक कर रहे थे। बीच में फोन आया, तो वो बाहर चले गए। उसी दौरान कुछ बच्चे खेलने लगे, और एक लड़का कुर्सी से गिर पड़ा। मामूली चोट थी, लेकिन लड़के के पिता, जो SC समुदाय से हैं, स्कूल पहुंचे। उन्होंने टीचर पर लापरवाही का आरोप लगाया। बात बढ़ी, तो SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज हो गई। पुलिस ने टीचर को हिरासत में ले लिया। लेकिन जांच में पता चला कि चोट मामूली थी, और टीचर ने तुरंत मदद भी की थी। फिर भी, केस चला।

टीचर रमेश सिंह, जो 15 साल से पढ़ा रहे हैं, ने बताया, “मैंने कभी किसी से भेदभाव नहीं किया। फोन जरूरी था, लेकिन मैं पांच मिनट में लौट आया। बच्चे को सीने में दबोच लिया, डॉक्टर को दिखाया। लेकिन पिता ने जाति का हवाला देकर केस कर दिया।” स्कूल मैनेजमेंट ने भी कहा कि ये लापरवाही नहीं, बल्कि सामान्य हादसा था। लेकिन पिता का कहना है, “मेरा बेटा SC है, टीचर ने जानबूझकर नजरअंदाज किया। एक्ट का इस्तेमाल करूंगा ही।” ये बात सुनकर गांव वाले दो हिस्सों में बंट गए। कुछ कहते हैं कि SC/ST एक्ट जरूरी है, ताकि दलितों पर अत्याचार न हो। लेकिन कई मानते हैं कि ऐसे मामलों में इसका दुरुपयोग हो रहा है।

सोशल मीडिया पर #MisuseOfSCSTAct ट्रेंड कर रहा है। एक यूजर ने लिखा, “लापरवाही हो सकती है, लेकिन अपमान कहां? एक्ट को बदले के लिए इस्तेमाल न करें।” सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार कहा है कि हर इंसल्ट SC/ST अपराध नहीं। 2024 में एक केस में कोर्ट ने कहा कि अपमान जानबूझकर जाति पर होना चाहिए। लेकिन ग्रामीण इलाकों में जागरूकता कम है, तो केस आसानी से बन जाते हैं। भदोही जैसे जिलों में पिछले साल ऐसे 20 से ज्यादा केस हुए, जिनमें आधे में सबूत कमजोर पाए गए। एक्ट का मकसद अच्छा है – दलितों को सुरक्षा देना – लेकिन दुरुपयोग से सिस्टम पर भरोसा कम हो रहा है।

पुलिस ने जांच पूरी की, और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। लेकिन अब डिफेंस वकील कह रहे हैं कि ये फर्जी केस है। अगर साबित हुआ, तो पिता पर भी कार्रवाई हो सकती है। ये घटना स्कूलों में सेफ्टी पर भी सवाल उठा रही है। क्या टीचरों को ट्रेनिंग मिलनी चाहिए? या एक्ट में गाइडलाइंस सख्त करनी चाहिए? भदोही के डीएम ने कहा कि जांच निष्पक्ष होगी, और गलत केस पर एक्शन लिया जाएगा।

ये बहस हमें सोचने पर मजबूर करती है कि कानून की रक्षा कैसे करें, ताकि वो कमजोरों के लिए हथियार बने, न कि बदले का जरिया। आप क्या कहते हैं? क्या SC/ST एक्ट में सुधार की जरूरत है? कमेंट्स में अपनी राय शेयर करें।

WhatsApp and Telegram Button Code
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Leave a Reply

Scroll to Top