Why Foreign Investment Risks in Africa Must Be Reduced – EFCC BOSS

अफ्रीका में विदेशी निवेश के जोखिम क्यों कम करने जरूरी हैं

अबूजा, 21 सितंबर 2025: अफ्रीका महाद्वीप संसाधनों से भरा पड़ा है – तेल, हीरे, कोबाल्ट से लेकर युवा आबादी तक। लेकिन विदेशी निवेश के मामले में ये एक पहेली है। 2006-2011 के बीच यहां निवेश पर रिटर्न 11.4% था, जो एशिया (9.1%) और लैटिन अमेरिका (8.9%) से ज्यादा। फिर भी, निवेशक कतार में लग रहे हैं। क्यों? क्योंकि जोखिम इतने ज्यादा हैं कि फायदे फीके पड़ जाते हैं। नाइजीरिया के EFCC चीफ ओला ओलुकोयेडे ने हाल ही में वाशिंगटन में कहा कि व्यापक सुधारों से ही ये जोखिम कम हो सकते हैं। आइए, समझें कि विदेशी निवेश के ये जोखिम क्यों कम करने की सख्त जरूरत है – अफ्रीका के विकास के लिए, और निवेशकों के भरोसे के लिए।

सबसे बड़ा मुद्दा राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता। साहेल क्षेत्र से लेकर दक्षिण अफ्रीका तक, तख्तापलट, चुनावी हिंसा और नीतिगत बदलाव आम हैं। 2024 की एक स्टडी में पाया गया कि ये अस्थिरता विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को 20-30% तक घटा देती है। मिसाल लीजिए, जिम्बाब्वे में 2019 का कृषि सुधार – विदेशी किसानों की जमीनें छीन ली गईं, निवेश भाग खड़ा हुआ। या फिर सूडान में गृहयुद्ध, जहां तेल कंपनियां अरबों डॉलर गंवा चुकीं। ये जोखिम न सिर्फ पूंजी को डराते हैं, बल्कि अफ्रीकी सरकारों को भी कर्ज के जाल में फंसाते हैं।

दूसरा, भ्रष्टाचार का जाल। अफ्रीका में कई देशों में रिश्वतखोरी और अनुबंधों में हेरफेर रोजमर्रा की बात है। EFCC ने बताया कि नाइजीरिया में ही 2024 में 4,111 दोषसिद्धियां हुईं आर्थिक अपराधों की। लेकिन ये पर्याप्त नहीं। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के मुताबिक, अफ्रीका में भ्रष्टाचार सालाना 148 अरब डॉलर का नुकसान करता है। विदेशी कंपनियां आती हैं, लेकिन जब उनके अधिकारियों को ‘फीस’ चुकानी पड़ती है, तो वो सोचती हैं – क्या ये फायदे के लायक है? ओलुकोयेडे ने कहा, “कानून का राज और मजबूत संस्थाएं ही निवेशकों को आकर्षित करेंगी।”

तीसरा, बुनियादी ढांचे की कमी। सड़कें, बिजली, बंदरगाह – सब घटिया। मलावी में उधार दरें 44% तक हैं, जो निवेश को महंगा बना देती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, अफ्रीका में ऊर्जा का 50% से ज्यादा जीवाश्म ईंधन पर निर्भर है, जो वैश्विक संक्रमण के समय जोखिम बढ़ाता है। 2023 में नवीकरणीय ऊर्जा में सिर्फ 15 अरब डॉलर निवेश हुआ, जो वैश्विक का 2.3% है। जलवायु जोखिम भी कम नहीं – 2022 में 110 मिलियन अफ्रीकी प्रभावित हुए, 8.5 अरब डॉलर का नुकसान।

चौथा, कर्ज का बोझ। कई देश पहले से ही ज्यादा कर्ज में डूबे हैं, जो नए निवेश को मुश्किल बनाता है। 2014 में कमोडिटी कीमतों के गिरने से फिस्कल घाटा 2% GDP बढ़ गया। चीन जैसे निवेशक अब कम जोखिम वाले क्षेत्रों पर शिफ्ट हो रहे हैं। ये स्थिति अफ्रीका को ‘डिजिटल कॉलोनियलिज्म’ की ओर धकेल रही है, जहां AI निवेश वैश्विक का 1% से कम है।

ये जोखिम कम क्यों करें? क्योंकि अफ्रीका की 2.5 अरब आबादी (2050 तक) एक बड़ा बाजार है। लेकिन बिना सुधारों के, FDI सिर्फ 3.5% वैश्विक का रह जाएगा। EFCC जैसे संस्थानों को मजबूत करना, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारना, और क्षेत्रीय एकीकरण बढ़ाना जरूरी। दक्षिण अफ्रीका में राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर FDI की समीक्षा हो रही है, जो मर्जर को राजनीतिक बना देती है।

अफ्रीका निवेशकों के लिए सुनहरा मौका है, लेकिन जोखिम कम न हुए तो ये खोया हुआ अवसर बनेगा। ओलुकोयेडे की तरह, सुधारों पर फोकस करें। आप क्या सोचते हैं? क्या अफ्रीकी सरकारें पर्याप्त कर रही हैं? कमेंट्स में बताएं।

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