पश्चिम बंगाल: मालदा के मोथाबारी में रामनवमी से पहले हिंसा, हिंदू इलाकों में तोड़फोड़

मालदा, 27 मार्च 2025 – पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के मोथाबारी में रामनवमी से ठीक पहले एक बार फिर सांप्रदायिक तनाव का माहौल देखने को मिला है। बुधवार देर रात कट्टरपंथी तत्वों ने हिंदू बहुल इलाकों में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की और हिंदुओं के घरों व दुकानों को निशाना बनाया। इस घटना से क्षेत्र में तनाव व्याप्त हो गया है, और स्थानीय लोग दहशत में हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक बड़ी भीड़ ने अचानक हिंदू इलाकों में प्रवेश किया और चुनिंदा तरीके से घरों, दुकानों और वाहनों को नुकसान पहुंचाया। हमलावरों ने न केवल संपत्ति को क्षति पहुंचाई, बल्कि कुछ स्थानों पर आगजनी की कोशिश भी की। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह हमला बिना किसी उकसावे के किया गया और इसका मकसद हिंदू समुदाय को डराना था। कुछ लोगों ने दावा किया कि हमलावरों ने धमकी दी कि वे “हिंदुओं का नामो-निशान मिटा देंगे” और “यहां जय श्री राम नहीं, बल्कि बिस्मिल्लाह बोला जाएगा।”

घटना का विवरण

यह हिंसा बुधवार रात करीब 10 बजे शुरू हुई, जब एक समूह ने हिंदू इलाकों में प्रवेश किया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमलावरों ने लाठी, डंडे और पत्थरों का इस्तेमाल किया। कई दुकानों के शटर तोड़े गए, वाहनों की खिड़कियां क्षतिग्रस्त की गईं और कुछ घरों में रखे सामानों को बाहर फेंककर नष्ट कर दिया गया। एक स्थानीय निवासी, रमेश मंडल (बदला हुआ नाम), ने बताया, “हम रात को अपने घरों में थे, तभी अचानक भीड़ आई और तोड़फोड़ शुरू कर दी। उन्होंने गालियां दीं और धमकियां दीं। हमारी गलती क्या थी, यह समझ नहीं आया।”

पुलिस की कार्रवाई और तनाव

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया और कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया। मालदा जिले के पुलिस अधीक्षक ने बताया, “हमने स्थिति पर काबू पा लिया है और जांच शुरू कर दी है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की प्रतिक्रिया देर से हुई, जिसके कारण नुकसान को रोका नहीं जा सका।

रामनवमी से पहले बढ़ी चिंता

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब कुछ ही दिनों में रामनवमी का त्योहार आने वाला है। पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों में रामनवमी के दौरान सांप्रदायिक हिंसा की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। मालदा, जो एक मुस्लिम बहुल जिला है, पहले भी ऐसी घटनाओं का गवाह रहा है। इस बार की हिंसा ने स्थानीय हिंदू समुदाय में डर और आक्रोश पैदा कर दिया है। कई लोगों ने प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है ताकि त्योहार शांतिपूर्वक मनाया जा सके।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस घटना ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राज्य की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर निशाना साधा है। बीजेपी के स्थानीय नेता ने कहा, “ममता बनर्जी की सरकार हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रही है। यह सुनियोजित हमला है, और सरकार की निष्क्रियता इसकी जिम्मेदार”,
“मालदा में हुई इस हिंसा की कड़ी निंदा करते हैं और राज्य सरकार से मांग करते हैं कि दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।” वहीं, टीएमसी ने इसे स्थानीय विवाद करार देते हुए इसे सांप्रदायिक रंग देने से इनकार किया है।

आगे की स्थिति

फिलहाल मोथाबारी में तनाव बना हुआ है। पुलिस ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है और शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं। स्थानीय लोग इस घटना से सकते में हैं और आने वाले दिनों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

इस घटना ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक सौहार्द और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जैसे-जैसे रामनवमी नजदीक आ रही है, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में रख पाएगा।

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