Saic plans 49% stake sale in jsw mg motor india

सॉइस ने जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया में 49% स्टेक बेचने की योजना बनाई: निवेश प्रतिबंधों के बीच बड़ा कदम

अरे भाई, ऑटो सेक्टर में तो जैसे भूचाल आ गया! कल ही एक दोस्त का मैसेज आया, “यार, चाइनीज कंपनी सॉइस एमजी बेचने वाली है, जेएसडब्ल्यू को। भारत में टेंशन बढ़ गई क्या?” सुनकर सोचा, हां, ये तो सही मुद्दा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की सॉइस मोटर अपनी जॉइंट वेंचर जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया में 49% स्टेक काफी कम करने की प्लानिंग कर रही है। नई इनवेस्टमेंट भी रोक दी है, लेकिन टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट्स सप्लाई जारी रखेगी। बात 2020 के बॉर्डर टेंशन के बाद लगे निवेश प्रतिबंधों से जुड़ी लगती है, जो चाइनीज कंपनियों पर फोकस्ड हैं।

देखिए, बैकग्राउंड क्या है। सॉइस ने 2019 में एमजी ब्रैंड के साथ भारत में एंट्री की, गुजरात के जीएम प्लांट को खरीदा। शुरुआत में 650 मिलियन डॉलर इनवेस्ट किए, लेकिन रेगुलेटरी हर्डल्स ने रुकावट डाली। 2023 में जेएसडब्ल्यू ग्रुप के साथ जॉइंट वेंचर बना – जेएसडब्ल्यू ने 35% स्टेक लिया, एवरस्टोन फंड ने 8%, डीलर ट्रस्ट 3% और एम्प्लॉयी स्टॉक 5%, तो सॉइस को बचा 49%। कुल वैल्यूएशन करीब 1.2 बिलियन डॉलर। लेकिन अब जेएसडब्ल्यू चेरी ऑटोमोबाइल के साथ अपनी ब्रैंड कार लॉन्च करने की बात कर रहा है, जिससे सॉइस को कॉन्फ्लिक्ट लग रहा। जेएसडब्ल्यू सॉइस के ज्यादातर स्टेक खरीदना चाहता है, लेकिन वैल्यूएशन पर मतभेद है – सॉइस ज्यादा कीमत मांग रही।

एमजी इंडिया ने अच्छा परफॉर्म किया है, 2019 में 16,500 यूनिट्स से 2024 में 61,000 तक पहुंच गई। ईवी सेगमेंट में टाटा के बाद नंबर दो। 240 मिलियन डॉलर का नया ईवी प्लान पेंडिंग है। सॉइस बाहर नहीं निकल रही, बस स्टेक कम करके रिस्क मैनेज करेगी। जेएसडब्ल्यू को मेजॉरिटी मिल जाए तो स्ट्रैटेजी आसान हो जाएगी, लेकिन टेक्नोलॉजी शेयरिंग पर सवाल उठेंगे।

ये देखकर लगता है, जियो-पॉलिटिकल टेंशन बिजनेस को कैसे प्रभावित कर रहे। भारत का ऑटो मार्केट ग्रो कर रहा, लेकिन ऐसे डील्स से अनिश्चितता बढ़ेगी। आप क्या सोचते हैं? जेएसडब्ल्यू एमजी लेंगे या चेरी वाली नई ब्रैंड? कमेंट में बताओ, शेयर करो।

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