जयपुर/नई दिल्ली: राजस्थान और मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से 18 मासूम बच्चों की जान चली गई। यह सिरप, जो सरकारी योजना के तहत मुफ्त बांटा जा रहा था, जहरीला निकला। दोषियों पर सख्त कार्रवाई कब होगी, यह सवाल अब पूरे देश को सता रहा है।
इस कांड ने न सिर्फ भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि रजस्थान कफ सिरप मौत, कोल्ड्रिफ सिरप केस, बच्चों की मौत जांच, कफ सिरप बैन, और भारतीय फार्मा घोटाला जैसे ट्रेंडिंग कीवर्ड्स को गूगल पर टॉप पर पहुंचा दिया है। राजस्थान सरकार ने 22 बैचों पर तत्काल बैन लगा दिया, लेकिन पीड़ित परिवार न्याय की राह देख रहे हैं।
घटना की शुरुआत: कैसे फैला जहर?
यह मामला अगस्त के आखिर से शुरू हुआ। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में नौ बच्चे किडनी फेलियर से मरे, जिन्हें डॉक्टरों ने कोल्ड्रिफ सिरप दिया था। जांच में पता चला कि सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल नामक जहरीला केमिकल मिला था, जो बच्चों के लिए घातक साबित हुआ। इसी तरह, राजस्थान के सीकर में पांच साल का नितीश कफ-कोल्ड की शिकायत पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां उसे यही सिरप पिलाया गया, और कुछ ही घंटों में उसकी हालत बिगड़ गई।
सीकर के अलावा, भरतपुर, बांसवाड़ा और जयपुर के संगानेर में भी इसी सिरप से दो साल की बच्ची की हालत गंभीर हो गई। कुल 18 मौतें—मध्य प्रदेश में 14 और राजस्थान में चार—इसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने की है। निर्माता कंपनी कैनसन फार्मा (जयपुर) और श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स (कांचीपुरम) के बैच नंबर KL-25/147, KL-25/148 और SR-13 पर शक है। राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMSCL) ने जुलाई से अब तक 1.33 लाख बोतलें वितरित की थीं, जिनमें से कई अब जब्त हो चुकी हैं।
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) की टीम ने सैंपल कलेक्ट किए हैं, और रिपोर्ट दो अक्टूबर तक आने की उम्मीद थी, लेकिन अभी तक कोई अंतिम नतीजा नहीं निकला। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को अलर्ट जारी किया है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ-कोल्ड सिरप न दें। महाराष्ट्र और तेलंगाना ने भी इन बैचों पर बैन थोप दिया।
जांच का फोकस: कौन जिम्मेदार?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाई-लेवल मीटिंग बुलाई, जिसमें राजस्थान की तारीफ की गई कि उन्होंने निगरानी बढ़ाई और पब्लिक एडवाइजरी जारी की। लेकिन ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा को सस्पेंड कर दिया गया। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने तीन सदस्यीय कमिटी गठित की, जो टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर फैसला लेगी। कंपनी को नोटिस भेजा जा चुका है।
फिलहाल, कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लैब रिपोर्ट पॉजिटिव आई, तो मैन्युफैक्चरर, डिस्ट्रीब्यूटर और डॉक्टरों पर IPC की धारा 304 (कल्पना से मौत) के तहत मुकदमा चलेगा। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने अप्रैल 2025 में 35 अनअप्रूvd फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन पर बैन लगाया था, लेकिन यह सिंगल-इंग्रीडिएंट डेक्सट्रोमेथॉर्फन सिरप था।
विशेषज्ञों की राय और जनाक्रोश
पेडियाट्रिक विशेषज्ञ डॉ. रवि शर्मा कहते हैं, “यह घोटाला 2023 के कफ सिरप कांड की याद दिलाता है, जब यूजबेकिस्तान में भारतीय सिरप से बच्चे मरे थे। गुणवत्ता जांच सख्त होनी चाहिए।” जनता में गुस्सा भरा है। सोशल मीडिया पर #JusticeForKids ट्रेंड कर रहा है। पीड़ित परिवारों ने प्रदर्शन किए, मांग की कि दोषियों को फांसी हो। एक डॉक्टर ने सिरप पीकर सेफ्टी साबित करने की कोशिश की, लेकिन बेहोश हो गया—यह वीडियो वायरल हो चुका है।
अमेरिकी पाठकों पर असर: भारतीय प्रवासियों के लिए चेतावनी
अमेरिका में 45 लाख भारतीय प्रवासी हैं, जिनमें से कई राजस्थान और मध्य प्रदेश से हैं। यह कांड उनके लिए चेतावनी है। एनआरआई कम्युनिटी में दहशत फैली है—कई परिवार भारत से दवाएं मंगवाते हैं। यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने भी भारतीय सिरप पर नजर रखी है। अगर यह घोटाला फैला, तो फार्मा एक्सपोर्ट पर असर पड़ेगा, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को छुएगा—भारत अमेरिका को सालाना 50 अरब डॉलर का फार्मा सामान बेचता है। लाइफस्टाइल में बदलाव: अब एनआरआई स्मार्टफोन ऐप्स से दवाओं की वैरिफिकेशन करेंगे, जैसे QR कोड स्कैन करके। पॉलिटिक्स में, यह इंडिया-यूएस हेल्थ कोऑपरेशन को मजबूत कर सकता है। टेक्नोलॉजी से, AI-बेस्ड ड्रग ट्रैकिंग सिस्टम की डिमांड बढ़ेगी। यहां तक कि स्पोर्ट्स फैंस—जैसे IPL देखने वाले—अपने बच्चों की दवाओं पर सतर्क होंगे।
यूजर इंटेंट: क्या करना चाहिए?
अगर आप कफ सिरप खरीद रहे हैं, तो बैच नंबर चेक करें। सरकारी हेल्पलाइन 104 पर कॉल करें। पैरेंट्स को सलाह: घरेलू उपाय जैसे शहद-आदूसा का काढ़ा आजमाएं। मैन्युफैक्चरर्स के लिए, क्वालिटी कंट्रोल स्ट्रिक्ट रखें। सरकार ने यूजर इंटेंट को ध्यान में रखते हुए पब्लिक पोर्टल लॉन्च किया, जहां दवा की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
यह मामला अभी जारी है। केंद्र की रिपोर्ट से दोषियों पर कार्रवाई का रास्ता साफ होगा। राजस्थान सरकार ने 19 दवाओं का वितरण रोका, लेकिन न्याय कब मिलेगा? ट्रेंडिंग कीवर्ड्स रजस्थान कफ सिरप मौत, कोल्ड्रिफ सिरप केस, बच्चों की मौत जांच, कफ सिरप बैन, और भारतीय फार्मा घोटाला अब भी चर्चा में हैं। पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसा न हो।
सैम माइकल द्वारा
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