INSURGENTS KILL Two Soldiers, Nine-Year-Child Boy in Borno Attack

बोर्नो में विद्रोहियों का हमला: दो सैनिकों और नौ साल के बच्चे की हत्या, हवाई हमले में 32 आतंकी ढेर

मैदुगुरी, बोर्नो स्टेट, 21 सितंबर 2025: बोर्नो स्टेट में फिर से खौफनाक हमला हुआ है। बमो हाराम और आईएसडब्ल्यूएपी के विद्रोहियों ने गुरुवार रात को बैंकि इलाके में सैन्य ठिकानों पर धावा बोल दिया। इस हमले में दो सैनिकों और एक नौ साल के मासूम बच्चे की जान चली गई। लेकिन भारतीय वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई में 32 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया। ये घटना बोर्नो के बामा लोकल गवर्नमेंट एरिया में हुई, जहां सालों से आतंक का साया मंडराता रहा है। स्थानीय लोग दहशत में हैं, और सवाल ये उठ रहा है कि कब तक ये सिलसिला चलेगा?

हमला 18 सितंबर की रात करीब 10:15 बजे शुरू हुआ। विद्रोहियों ने बुला योबे फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस, 152 बटालियन और डिविजनल पुलिस हेडक्वार्टर पर एक साथ हमला बोला। अंधेरे का फायदा उठाकर वो भारी हथियारों से लैस थे। सैनिकों ने मुकाबला किया, लेकिन गोलीबारी में दो जवान शहीद हो गए। सबसे दर्दनाक ये कि एक नौ साल का बच्चा, इस्माइल अबूबकर, भी क्रॉसफायर में मारा गया। वो बैंकि में अपने परिवार के साथ रहता था, और हमले के दौरान बाहर खेल रहा था। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, विद्रोहियों ने तीन सैन्य वाहनों को भी आग लगा दी।

सैन्य प्रवक्ता ने बताया कि जैसे ही डिस्ट्रेस कॉल आया, ऑपरेशन हदिन काई के एयर कंपोनेंट को अलर्ट किया गया। इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस प्लेटफॉर्म ग्रे रैप्टर ने विद्रोहियों की मूवमेंट ट्रैक की। दो ए-29 सुपर टुकानो एयरक्राफ्ट तैनात किए गए, जो खुफिया जानकारी के आधार पर भागते हुए आतंकियों पर कई स्ट्राइक्स किए। इन हवाई हमलों में कम से कम 32 विद्रोही मारे गए – कुछ असेंबली पॉइंट्स पर, तो कुछ बैटलफील्ड से भागते वक्त। शहीद सैनिकों के शवों को मेडुगुरी के हेडक्वार्टर ले जाया गया, जबकि बच्चे के शव को परिवार को सौंप दिया गया। इस्लामिक रीति से उसका दफन हो गया।

ये हमला बोर्नो में बमो हाराम की बढ़ती हलचल का संकेत है। राज्यपाल बाबागाना जुलुम ने पहले ही चेतावनी दी थी कि आतंकी वापसी कर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में कई हमले हुए हैं, जिनमें सैन्य कैंप और गांव निशाना बने। लेकिन नाइजीरियन आर्मी और एयर फोर्स की सतर्कता से कई बार नुकसान रोका गया। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “रात को डर लगता है। बच्चे घर से बाहर न खेलें, ये सोचना पड़ता है। लेकिन सैनिक भाइयों का शुक्रिया, उन्होंने जवाब दिया।”

ये घटना पूरे देश को झकझोर रही है। बोर्नो जैसे इलाकों में शांति कब आएगी? क्या और मजबूत इंटेलिजेंस और कम्युनिटी सपोर्ट से इसे रोका जा सकता है? सैन्य ऑपरेशंस तेज हो रहे हैं, लेकिन आम लोगों की जिंदगी पर असर पड़ रहा है। आप क्या सोचते हैं? क्या आतंकवाद के खिलाफ जंग में और सख्त कदम उठाने चाहिए? कमेंट्स में अपनी राय शेयर करें।

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