हेलो दोस्तों, एक बार फिर देश में एक बयान ने तहलका मचा दिया है। इस बार मामला सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बी. आर. गवई से जुड़ा है, जिनके एक बयान ने सोशल मीडिया पर आग लगा दी। CJI गवई ने हाल ही में एक कार्यक्रम में भगवान विष्णु का जिक्र करते हुए कुछ ऐसा कहा, जिसे लेकर अब आस्था और न्यायपालिका के बीच टकराव की बातें शुरू हो गई हैं। आखिर क्या है पूरा मामला? चलिए, जानते हैं।
दरअसल, CJI गवई ने एक इवेंट में कहा, “न्याय का काम भगवान विष्णु की तरह है, जो संतुलन बनाए रखते हैं। हमारा काम भी समाज में संतुलन और न्याय सुनिश्चित करना है।” बस, यही बात कुछ लोगों को पसंद नहीं आई। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देखा और आरोप लगाया कि एक जज को धार्मिक संदर्भों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। एक X पोस्ट में लिखा गया, “न्यायपालिका को धर्म से दूर रहना चाहिए। CJI का यह बयान गलत संदेश देता है।” वहीं, कुछ लोगों ने उनका समर्थन करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक उदाहरण था, जिसे गलत समझा जा रहा है।
यह अपमान थोड़ी माना जाएगा है ना सुलारो 😡😡 अगर कमेंट बॉस में #ग्वार_गवई_हिंदू_विरोधी नहीं लिख सकते तो सोशल मीडिया छोड़ दो ।😤😤 pic.twitter.com/boKXin6GfQ
— SanataniRiddhi (@Ridhu417Sharma) September 18, 2025
विपक्षी नेताओं ने इस बयान को लेकर सवाल उठाए हैं। एक नेता ने कहा, “जब देश में धार्मिक तनाव पहले से मौजूद हैं, तो ऐसे बयान स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं।” दूसरी ओर, सत्ताधारी दल के समर्थकों का कहना है कि CJI ने सिर्फ एक सांस्कृतिक संदर्भ दिया, जिसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। कुछ ने इसे CJI की आजादी और अभिव्यक्ति का हिस्सा बताया।
यह पहली बार नहीं है जब न्यायपालिका और आस्था का मुद्दा चर्चा में आया है। पहले भी PM मोदी के CJI चंद्रचूड़ के घर गणेश पूजा में शामिल होने पर सवाल उठे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि जजों को अपने बयानों में सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि उनकी बातों का समाज पर गहरा असर पड़ता है।
CJI गवई ने अभी इस विवाद पर कोई सफाई नहीं दी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के सूत्रों का कहना है कि यह सिर्फ एक सामान्य टिप्पणी थी। क्या यह बयान वाकई गलत था, या इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है? आप क्या सोचते हैं? कमेंट में बताएं।
स्रोत: यह लेख सामान्य जानकारी और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर आधारित है। विशेष जानकारी के लिए देखें: https://www.hindustantimes.com