हेलो दोस्तों, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बी. आर. गवई एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनके एक हालिया बयान ने न सिर्फ सोशल मीडिया पर तूफान मचा दिया है, बल्कि धार्मिक तनाव और न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कुछ लोगों ने उनके खिलाफ महाभियोग की मांग तक कर दी है। आखिर क्या कहा CJI गवई ने, और क्यों मचा है इतना हंगामा? चलिए, जानते हैं।
हाल ही में दिल्ली में एक कार्यक्रम में CJI गवई ने भगवान विष्णु का जिक्र करते हुए कहा, “न्याय का काम भगवान विष्णु की तरह है, जो समाज में संतुलन बनाए रखते हैं। हमारा उद्देश्य भी यही है।” इस बयान को कुछ लोगों ने धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देखा और इसे न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाला बताया। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने इसे “अनुचित” करार देते हुए कहा कि एक जज को धार्मिक संदर्भों से बचना चाहिए। एक X पोस्ट में लिखा गया, “CJI का यह बयान धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है। क्या अब कोर्ट भी धर्म के आधार पर फैसले लेगा?”
विपक्षी नेताओं ने इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक नेता ने कहा, “जब देश में पहले से धार्मिक तनाव है, तो CJI का ऐसा बयान गलत संदेश देता है। हम महाभियोग की मांग करते हैं।” दूसरी ओर, सत्ताधारी दल और कुछ संगठनों ने इसे सिर्फ एक सांस्कृतिक उदाहरण बताया। एक समर्थक ने ट्वीट किया, “CJI ने सिर्फ एक सामान्य बात कही। इसे धार्मिक रंग देना गलत है।”
यह विवाद तब और गहरा गया, जब कुछ लोग इसे पहले के एक बयान से जोड़ने लगे, जिसमें CJI ने अपने “झुग्गी” वाले बैकग्राउंड का जिक्र किया था। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बयान निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं, खासकर जब देश में धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर पहले से तनाव है। सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया, लेकिन यह मामला लोगों में बहस का कारण बन गया है। क्या यह बयान वाकई गलत था, या इसे गलत समझा जा रहा है? आप क्या सोचते हैं? कमेंट में बताएं।
