2012 में एक कार्टून के लिए कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को जेल: देशद्रोह का आरोप और विवाद

नई दिल्ली, [24-12-2025] – साल 2012 में जब देश में यूपीए सरकार का शासन था और डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब एक कार्टूनिस्ट को महज एक कार्टून बनाने के आरोप में देशद्रोह (आईपीसी की धारा 124A) सहित 12 गंभीर धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था। यह मामला कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी का था, जिन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर एक विवादास्पद कार्टून बनाया था।

क्या था पूरा मामला?

असीम त्रिवेदी ने 2012 में एक कार्टून बनाया, जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई गई थी। इस कार्टून में संसद भवन को एक “मेंढकों का तालाब” दिखाया गया था और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भ्रष्टाचार से जुड़े संकेतों के साथ चित्रित किया गया था। यह कार्टून “Save Your Voice” नामक एक अभियान का हिस्सा था, जो इंटरनेट सेंसरशिप के खिलाफ लड़ रहा था।

गिरफ्तारी और कड़े आरोप

त्रिवेदी को दिसंबर 2011 में पहली बार गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 2012 में उन पर आईटी एक्ट की धारा 66A, 67 (अश्लील सामग्री के प्रसार के लिए) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A (देशद्रोह), 120B (षड्यंत्र), 292 (अश्लीलता फैलाना) सहित कुल 12 धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

उन्हें 60 दिनों तक जेल में रखा गया, जिसके बाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले में मानवाधिकार संगठनों और मीडिया ने हस्तक्षेप किया। बाद में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी, लेकिन यह मामला भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक बड़ा सवाल बनकर उभरा।

विवाद और सवाल

  • क्या एक कार्टून देशद्रोह हो सकता है? – कई विशेषज्ञों ने इस गिरफ्तारी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) का उल्लंघन बताया।
  • IT Act की धारा 66A – जिसके तहत त्रिवेदी पर केस बना, उसे 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित कर दिया
  • देशद्रोह कानून का दुरुपयोग? – कई मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकारें देशद्रोह कानून का इस्तेमाल विरोधियों को चुप कराने के लिए करती हैं

आज कहां है असीम त्रिवेदी?

इस घटना के बाद असीम त्रिवेदी मुक्त अभिव्यक्ति के पक्ष में सक्रिय हो गए। उन्होंने “Save Your Voice” जैसे अभियानों के जरिए इंटरनेट सेंसरशिप के खिलाफ लड़ाई जारी रखी।

निष्कर्ष: क्या सबक मिला?

असीम त्रिवेदी का मामला भारत में अभिव्यक्ति की आजादी की लड़ाई का एक अहम पड़ाव बन गया। यह केस यह सवाल उठाता है कि क्या सरकारें आलोचना को देशद्रोह बता सकती हैं?

2015 में धारा 66A को खत्म करने का फैसला इस दिशा में एक बड़ा कदम था, लेकिन देशद्रोह कानून (124A) अभी भी बना हुआ है, जिसका दुरुपयोग होने का खतरा बरकरार है।

Newspaper – realnewshub.com [email protected]

क्या आपको लगता है कि कार्टून या व्यंग्य पर देशद्रोह जैसे गंभीर आरोप लगाना उचित है? हमें अपनी राय कमेंट में बताएं।

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