उत्तराखंड में परीक्षा घोटाले की जड़ें गहरी: खालिद मलिक की गिरफ्तारी ने खोला पर्दा

UKSSSC पेपर लीक का मुख्य आरोपी खालिद मलिक बहन के साथ गिरफ्तार, जांच में अब तक हुआ बड़ा खुलासा

देहरादून, 24 सितंबर 2025: उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों की दौड़ में धांधली का एक और काला अध्याय लिखा गया। यूकेएसएसएससी (उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग) की ग्रेजुएट लेवल भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने से हड़कंप मच गया, और अब मुख्य आरोपी खालिद मलिक की गिरफ्तारी ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी। खालिद ने खुद परीक्षा दी, पेपर के स्क्रीनशॉट हॉल से ही अपनी बहन सबिया को भेजे, और फिर एक प्रोफेसर से जवाब मंगवाए। पुलिस ने उसे हरिद्वार के लक्सर से पकड़ा, लेकिन ये सिर्फ एक घटना नहीं – ये उत्तराखंड में परीक्षा मालप्रैक्टिस की पुरानी बीमारी का नया चेहरा है।

ये घोटाला 21 सितंबर की परीक्षा के दौरान सामने आया। बहादुरपुर जाट सेंटर में खालिद ने मोबाइल फोन इस्तेमाल किया, जबकि वहां जामर लगना था। जांच में पता चला कि उसके कमरे में जामर ही नहीं था। खालिद ने तीन पेजों के स्क्रीनशॉट बहन सबिया को भेजे, जिन्होंने उन्हें टिहरी की असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन चौहान को फॉरवर्ड कर दिए। सुमन ने 10 मिनट में जवाब तैयार कर भेजे। लेकिन सुमन को शक हुआ, तो उन्होंने बॉबी पंवार को भी पेज भेज दिए, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। पुलिस ने खालिद को तीन दिन फरार रहने के बाद गिरफ्तार किया। उसकी बहन सबिया पहले ही हिरासत में है, जबकि दूसरी बहन हिना और सुमन पर भी शक है।

पुलिस ने रायपुर थाने में उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम) अध्यादेश 2023 के तहत केस दर्ज किया। एसआईटी स्टाफ और जामर टीम से पूछताछ कर रही है। हरिद्वार एसएसपी प्रमोद सिंह डोबाल ने कहा, “खालिद का फोन ट्रैकिंग से पकड़ा गया। उसके घर पर अवैध बिजली कनेक्शन भी मिला, पिता पर केस चलेगा।” मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कहा कि परीक्षा धांधली करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

लेकिन ये पहला केस नहीं। उत्तराखंड में पेपर लीक की जड़ें गहरी हैं। 2021-22 में पटवारी भर्ती का पेपर लीक हुआ, जिसमें 20 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं। 2023 में वन दरोगा परीक्षा रद्द करनी पड़ी। राज्य में हर साल 5-6 लाख युवा सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षा देते हैं, लेकिन लीक के कारण लाखों का भविष्य दांव पर लग जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि जामर की कमी, सेंटर मैनेजमेंट की लापरवाही और सॉल्वर गिरोहों का नेटवर्क मुख्य वजहें हैं। एक अभ्यर्थी ने बताया, “हम मेहनत करते हैं, लेकिन ये धांधली सब बर्बाद कर देती है।”

ये घटना सरकार पर सवाल खड़ी कर रही है। क्या सख्त जामर, सीसीटीवी और साइबर सिक्योरिटी से इसे रोका जा सकता है? या परीक्षा प्रक्रिया ही बदलनी पड़ेगी? एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार है।

आप क्या सोचते हैं? क्या उत्तराखंड में परीक्षा सिस्टम को पूरी तरह नया बनाना चाहिए? कमेंट्स में अपनी राय शेयर करें।

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