सुप्रीम कोर्ट में 88,000 से ज्यादा लंबित मामलों का सच: वरिष्ठ वकीलों को प्राथमिकता मिल रही थी?

नई दिल्ली, 23 सितंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले लाखों लोग इंतजार कर रहे हैं। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि वहां 88,417 मामले अटके पड़े हैं – ये संख्या सितंबर 2025 तक का रिकॉर्ड हाई है। हर साल नई फाइलिंग्स पुराने केसों से ज्यादा हो रही हैं, और डिस्पोजल रेट 88% रहने के बावजूद बैकलॉग बढ़ता जा रहा। लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या इसमें वरिष्ठ वकीलों को मिलने वाली प्राथमिकता का हाथ है? हाल ही में सीजेआई बीआर गवई ने इस पर ब्रेक लगाया है, लेकिन पहले की व्यवस्था ने कई सवाल खड़े किए हैं।

नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के मुताबिक, जनवरी से अगस्त 2025 तक 52,630 नए केस फाइल हुए, जबकि सिर्फ 46,309 निपटे। सिविल केस 69,553 और क्रिमिनल 18,864 हैं। जजों की कमी, जटिल मामले और कोविड जैसी महामारी ने तो बैकलॉग बढ़ाया ही, लेकिन अंदरूनी वजहें भी कम नहीं। कई बार सुनवाई में वरिष्ठ वकीलों को प्राथमिकता मिलती थी – उनके उर्जेंट मेंशन पर केस जल्दी लिस्ट हो जाते। जूनियर वकील या छोटे केस पीछे धकेल दिए जाते। एक वकील ने बताया, “वरिष्ठ एडवोकेट्स का नाम आते ही बेंच तुरंत सुन लेती, लेकिन आम लोगों के मामले सालों इंतजार करते रहते।”

ये प्राथमिकता कोई नई बात नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार जूनियर वकीलों को मौका देने की बात कही, लेकिन अमल कमजोर रहा। फिर अगस्त 2025 में सीजेआई गवई ने बड़ा कदम उठाया। 11 अगस्त से उनके कोर्ट में वरिष्ठ वकीलों को उर्जेंट लिस्टिंग के लिए मेंशन करने की मनाही हो गई। मकसद साफ – जूनियर एडवोकेट्स को बराबरी का मौका। सीजेआई ने कहा, “ये फैसला युवा वकीलों को सशक्त बनाने के लिए है।” ये बदलाव बैकलॉग कम करने में मदद कर सकता है, क्योंकि अब केसों की लाइन बराबर हो रही। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि पूरे सिस्टम में ये लागू हो, तभी फर्क पड़ेगा।

फिर भी, बैकलॉग का बोझ आम आदमी पर पड़ता है। एक किसान का जमीन का केस या छोटे व्यापारी का विवाद – सब सालों तक लटके रहते। सुप्रीम कोर्ट ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट और डिजिटल हियरिंग की सिफारिश की है, लेकिन जजों की 20% वैकेंसी भरी नहीं। क्या वरिष्ठ वकीलों की प्राथमिकता ही मुख्य वजह थी? शायद नहीं, लेकिन ये एक हिस्सा जरूर था। अब नई नीति से उम्मीद है कि न्याय का पहिया तेज चलेगा।

ये आंकड़े हमें सोचने पर मजबूर करते हैं कि न्यायपालिका को और मजबूत कैसे बनाएं। क्या जूनियर वकीलों को और मौके मिलने चाहिए? या बैकलॉग कम करने के लिए और जजों की भर्ती? अपनी राय कमेंट्स में शेयर करें।

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